ऑनलाइन प्रशिक्षण में शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी ने शामिल होकर शिक्षकों से सीधे बातचीत की


बस्ती। लॉकडाउन के दौरान शिक्षकों को लर्निंग एसेसमेंट के प्रति जागरूक करने के लिए राज्य स्तर पर ऑनलाइन 30 घण्टे की  एक लर्निंग एसेसमेंट कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें प्रदेश के सभी जनपदों से 100 शिक्षकों ने ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया। रविवार को इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी ने शामिल होकर शिक्षकों से सीधे बातचीत की। शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी ने लाकडाउन के दौरान संचालित किए गए इस नवीन प्रयास के लिए एसआईटी की निदेशक सुश्री ललिता प्रदीप व बस्ती के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त शिक्षक डॉक्टर सर्वेष्ट मिश्र के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न जनपदों के शिक्षकों से बातचीत की और इस नए प्रयोग से सीखे गए ज्ञान को अपने जिलों तक पहुंचाने की बात की। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रदेश स्तर पर यह 100 शिक्षक तैयार किए गए हैं अपने जनपदों में भी कम से कम 100 शिक्षकों की टीम तैयार करें। उन्होंने वर्तमान में लॉक डाउन के दौरान संचालित की जा रही ऑनलाइन कक्षाओं की प्रशंसा करते हुए शिक्षकों की तारीफ करते हुए कहा कि किस तरह उच्च व माध्यमिक शिक्षा में भी बेसिक शिक्षकों की कार्य से प्रेरणा ली गई। उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजकों से एक ऐसा प्लेटफार्म विकसित करने की की बात कही जिससे प्रदेश के हजारों शिक्षकों को एक साथ जोड़ कर उन्हें ऐसे कार्यक्रमों का लाभ दिया जा सके। कार्यक्रम में एसआईईटी निदेशक सुश्री ललिता प्रदीप ने पूरे कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा बताते हुए एसआईईटी की भूमिका की जानकारी दी।


कार्यक्रम में शामिल सभी शिक्षकों को बेसिक शिक्षा मंत्री व अपर शिक्षा निदेशक द्वारा ऑनलाइन प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए कार्यशाला के संयोजक राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त शिक्षक डॉ सर्वेष्ट मिश्र ने बताया कि 30 घंटे की इस कार्यशाला में आकलन, शैक्षिक आकलन, आकलन के प्रकार, उसके उद्देश्य, राज्य, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के आकलन, आकलन की रूपरेखा, विभिन्न शब्दावली, स्कूल स्तरीय आकलन व प्रश्न निर्माण के तरीके सिखाए गए। पूरे कार्यक्रम के दौरान 02 ऑनलाइन टेस्ट भी लिए गए। जिसमें शिक्षकों ने प्रतिभाग कर प्रमाण पत्र प्राप्त किए। उन्होंने बताया कि इसी श्रंखला में अब वह स्कूल लीडरशिप, आईसीटी, शिक्षण शास्त्र, तथा शिक्षकों की विभिन्न जरूरतों के अनुसार नए पाठ्यक्रम संचालित करने की उनकी योजना है। जिस पर शीघ्र ही कार्य शुरू किया जाएगा। कार्यक्रम को संचालन करने में विशेषज्ञ के रूप में ऑस्ट्रेलियन काउंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च की वरिष्ठ विशेषज्ञ श्रीमती अनुराधा शर्मा, प्राचार्य डायट वाराणसी श्री उमेश शुक्ला , डायट प्रवक्ता श्री आशुतोष श्रीवास्तव, एससीईआरटी प्रवक्ता श्री प्रदीप जायसवाल,  डॉ अंबिकेश त्रिपाठी बीएचयू की एसोसिएट प्रोफेसर प्रियंका श्रीवास्तव व श्री विकास सक्सेना का विशेष योगदान रहा। तकनीकी सहयोग में विमल आनंद, वीरेंदर परनामी, शिवम सिंह, आशीष शुक्ल, शिवानी सिंह, वर्षा श्रीवास्तव का योगदान रहा। समूह कार्य में सहयोग देने में असेसमेंट टीम के विनीत पवार, श्वेता सोमवंशी, सत्यजीत द्विवेदी, सुषमा तिवारी, रश्मि त्रिपाठी, पम्मी मलिक, आरती,  मुनव्वर मिर्जा सहित अन्य शिक्षकों का योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों को उनके मेल पर ऑनलाइन पत्र प्रेषित किए गए।


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