गोशाला के लिए योगी के सपनों पर पतीला लगा रहे है जिम्मेदार,कौन होगा जिम्मेदार


बस्तीः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गो वंशों की उचित देखरेख के लिये गो आश्रय स्थलों का वृहद स्तर पर निर्माण कराया। प्रदेश में हजारों गौशालाओं पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। लेकिन जिम्मेदार अफसरों की संवेदनहीनता और मिल बांटकर खाने की रणनीति से सरकार की अति महत्वांकाक्षी योजना सवालों से घिर गयी। महज एक गौशाला का सच उजागर करने पर दो पत्रकारों के खिलाफ मुख्य चिकित्साधिकारी अश्वनी कुमार तिवारी ने मुकदमा दर्ज करवा दिया है। 


लेकिन गो आश्रय स्थलों की सच्चाई सामने लाने का सिलसिला जारी रहेगा। पत्रकारों की टीम ने शुक्रवार को जिस गौशाला की पड़ताल किया उसमे दुबौलिया विकास खण्ड के रमना तौफीर तथा रामनगर विकास खण्ड के टड़ौठी स्थित गौशाला शामिल है। रमना तौफीर की बात करें तो 1 करोड़ 20 लाख से निर्मित इस गौशाला का उद्घाटन स्वयं सीएम योगी ने 28 जनवरी 2019 को किया था। उन्हे उम्मीद रही होगी कि यहां तो पशु रखे जायेंगे उसकी उचित देखरेख होगी, उन्हे समय से पर्याप्त चारा भूसा पानी दिया जायेगा और बीमार होने पर उनका समय से इलाज होगा। लेकिन सबकुछ इसका उल्टा है। यहां कुल 145 पशुओं में आधा दर्जन बीमार हैं। 


इसकी सूचना प्रधान के जरिये उच्चाधिकारियों को दी गयी लेकिन संवेदनहीनता बरतते हुये न तो किसी ने बीमार पशुओं का हाल जाना और न ही डाक्टर उनका इलाज करने आये। यहां पशुओं की देखरेख के लिये 4 सफाईकर्मी तैनात किये गये हैं। अलग अलग शिफ्ट में दो लोग डियूटी करते हैं। चारा भूसा की बात करें तो यहां पशुओं की संख्या के हिसाब से कभी चारा भूसा दाना आदि नही मिलता है। तैनात कमैचारी ने बताया कि महीने में एक बोरी दाना मिलता है जो शायद 50 किलो का होता है। डाक्टर का कहना है रोज 4 किलो दाने में काम चलाओ। प्रति पशु कितना हिस्सा आयेगा इसे बताने की जरूरत नहीं है। सवाल ये है कि 145 पशुओं में बोरी दाना भेजने का आदेश किसका है, सरकार का, स्थानीय हुक्मरानों का या फिर गांव की सरकार का ? 


फिलहाल सवाल बड़ा भी है गंभीर भी। कमोवेश यही हाल चारा भूसा का भी है। इन खामियों पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की नजर नही है या फिर इन परदा डालना उनकी कार्यशैली है ? यह जांच में पता चलेगा। सबसे खास बात ये निकलकर आई है कि यहां मरणासन्न आधा दर्जन पशुओं में 2-3 की हालत नाजुक है। मुख्यमंत्री और उनके समर्थकों का गो वंशों से जो लगाव है उसे किसी प्रमाण की जरूरत नही है। भाजपा नेता एवं कप्तानगंज के सांसद प्रतिनिधि सुनील कुमार सिंह पत्रकारों के सामने ही एक पशु को पकड़कर रोने लगे जो कई दिनों से बीमार है और उसके शरीर में कीड़े पड़ रहे हैं। सांसद प्रतिनिधि इन निरंकुश अफसरों के आगे इतना बेबस है तो आम आदमी की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।


दूसरी गौशाला की जो तस्वीर हम दिखाना चाहते हैं वह रामनगर विकास खण्ड के टड़ौठी गांव में स्थित गौशाला की है। यहां कुल पशु 18 है, दो सफाईकर्मी इनकी नियमित देखरेख करते हैं। यहां भी आधा दर्जन पशु बीमार हैं। इसमे कुछ मरणासन्न हैं। योजना के आरम्भ में ही इसकी स्थापना हुई। मौके पर भूसा मिला लेकिन चारा दाना नदारद था। प्रधान विमल चौधरी ने बताया आधीं आई थी, तेज हवा में चारा दाना सब उड़ गया, दो किलो आटे का चोकर लाया हूं। वही जानवरों को खिलाया जायेगा। टीन शेड उड़ गया था उसे ठीक कराने के बाद चारा दाना मंगवाया जायेगा। 


दो किलो चोकर में 18 पशुओं को खिलाने का फार्मूला प्रधान ने किससे सीखा है ये नही मालूम, लेकिन जो बात वे खुद कह रहे हैं इस पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कैसे परदा डाल पायेंगे। देखा जाये तो यही स्थिति करीब करीब तमाम गो आश्रय स्थलों की है। जहां जानवरों को देखकर दया लगती है और बरबस मुहं से निकल पड़ता है इससे अच्छा तो तब था जब पशु आजाद थे, कम से कम अपने हिस्से का निवाला तो ढूढ़ लेते थे। फिलहाल मॉनीटरिंग इसी स्तर की रही तो संवदेनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा हाशिये पर जाने में वक्त नही लगेगा और बेजुबान बेमौत मरते रहेंगे।


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