एजोला हरा चारा देने से पशुओं में कैल्शियम, फॉस्फोरस, लोहे की आवश्यकता की पूर्ति होती:-मुख्य पशु चिकित्साधिकारी


बनकटी।.स्थानीय विकास खण्ड के अस्थाई गौ आश्रय स्थल शोभनपार मेंं सोशल डिस्टेंंसिंंग का पालन करते हुए  नये एजोला पौष्टिक हरा चारा का शुभारंभ करते हुए मुख्य पशु चिक्तिसाकारी अश्वनी कुमार तिवारी ने बताया की एजोला सस्ता, सुपाच्य एवं पौष्टिक पूरक पशुओं के लिए हरा चारा है इसे खिलाने से वसा व वसा रहित पदार्थ सामान्य आहार खाने वाले पशुओं के दूध में अधिक पाई जाती है। पशुओं में बांझपन निवारण,  पेशाब में खून की समस्या, तथा फॉस्फोरस की कमी को दूर करने मेंं सहायक होती है। एजोला हरा चारा देने से पशुओं में कैल्शियम, फॉस्फोरस, लोहे की आवश्यकता की पूर्ति होती है जिससे पशुओं का शारिरिक विकास होता है। एजोला में प्रोटीन, अमीनो एसिड, विटामिन (विटामिन ए, विटामिन बी-12 तथा बीटा-कैरोटीन) एवं खनिज लवण जैसे कैल्शियम, फास्फ़ोरस, पोटेशियम, आयरन, कापर, मैगनेशियम आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। इसमें शुष्क मात्रा के आधार पर 25-35 प्रतिशत प्रोटीन, 10-15 प्रतिशत खनिज एवं 7-10 प्रतिशत एमीनो  अम्ल, जैव सक्रिय पदार्थ एवं पोलिमर्स आदि पाये जाते है। इसमें कार्बोहाइड्रेट एवं वसा की मात्रा अत्यंत कम होती है। अतः इसकी संरचना इसे अत्यंत पौष्टिक एवं असरकारक आदर्श पशु आहार बनाती है। यह गाय, भैंस, भेड़, बकरियों,मछलियों, मुर्गियों आदि के लिए एक आदर्श चारा है। 


         डॉक्टर प्रशांत कुमार ने दूध उत्पादन में उपयोगी एजोला चारे को बताते हुए कहा कि इससे दूध में वसा की मात्रा बढ़ती है। एजोला के चलते दूध का उत्पादन बीस फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। शंकर नस्लीय गायों में एजोला की सहायता से खर्च भी कम होता है साथ ही दूध का उत्पादन भी 35 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इसे राशन के साथ समान अनुपात में मिलाकर पशु को खिलाया जा सकता है। इस प्रकार महंगे राशन से खर्च कम किया जा सकता है।


        पशुधनप़सार अधिकारी सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान  संस्थान झांसी में प्रशिक्षणोंपरांत अस्थाई गौ आश्रय स्थलों पर संरक्षित पशुओंं में निगेटिव फीड बैलैंस कि समस्या को देखते हुए शोभनपार गौआश्रय मेंं विकसित किया जा रहा है ऐसे ही धीर-धीरे अन्य गौ आश्रय स्थलों मे भी  विकसित किया जाएगा । पशुपालकों से अपील किया कि इस पौष्टिक हरे चारे का उत्पादन करें ।


      फार्मासिस्ट गणेश कुशवाहा ने बताया की नेशनल रिसोर्स डेवलेपमेंट विधि के अनुसार इसे प्लास्टिक शीट के साथ 2 मी.X 2मी. X 0.2मी का क्षेत्र तैयार कर इसमें 15 किग्रा. तक उपजाऊ मिट्टी डालते हैं। फिर इसे 2 किग्रा. गोबर और 30 ग्राम सुपर फास्फेट डालते हैं। इसके बाद में पानी डालकर इसका स्तर 10 सेमी. तक पहुंचा दिया जाता है। अब एजोला की एक किग्रा. की मात्रा को डालते हैं। देखते ही देखते 48 घंटों मे दो गुना ग्रोथ बढ़ जाता है तथा 10 से 15 दिन बाद अजोला की लगभग आधा किलो मात्रा  मिलने लगेगी।


इस अवसर पर मुख्य रूप से विश्राम पाल, पवन कुमार यादव, राम दिनेश, जिला पंचायत सदस्य ज्ञान चंद चौधरी , राम अशिष मौर्या, रामकृष्ण, दिनेश कुमार, राकेश चौधरी, जितेंद्र, रामायण चौधरी, मायाराम, राघवेंद्र ,राधेश्याम, कालिका प्रसाद त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।


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