हिमालयन रत्न सृजन सम्मान से सम्मानित हुए कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु

 


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बुलंदी का कौन सा क़िस्सा सुना रहे हो मुझको !

मेरी ज़िंदगी का क़िस्सा सुनो सुनाना भूल जाओगे !! संघर्ष को प्रेरित करता हुआ यह शेर अंबेडकरनगर के कवि व मंच संचालक तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु की खुद्दारी को बयां करता है ! पेशे से शिक्षक जिज्ञासु जी कविता और साहित्य की दुनिया में एक अलग पहचान रखते हैं ! ऑनलाइन हो या ऑफलाइन कवि सम्मेलन व मुशायरे की महफ़िल में अपने संचालन से चार चांद लगा देते हैं ! अब तक जिज्ञासु की 3 पुस्तकें एवं कई साझा काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं ! जिज्ञासु की लेखनी सामाजिक विसंगतियों एवं आम आदमी की ज़िंदगी की सच्चाईयों को बखूबी रचनाओं में पिरोने का हुनर रखती है ! कई साहित्यिक संस्थाओं से सम्मान प्राप्त कर चुके जिज्ञासु को हाल ही में प्रख्यात राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था हिमालयन अपडेट द्वारा हिमालयन रत्न सृजन सम्मान से सम्मानित किया गया है ! संस्था के सम्मानित सदस्यों के साथ साथ शिक्षक व साहित्य जगत के मित्रों ने कवि जिज्ञासु को बधाई व शुभकामनाएं दी हैं !

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