गुरु अर्जन देव जी का 415 शहीदी वा गुरपूर्व बड़े ही श्रद्धा एम सादगी के साथ मनाया गया

 


बस्ती:-शहीदों के सरताज शांति एकता के प्रतीक सिखों के पांच वे गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहब जी के रचियता श्री गुरु अर्जन देव जी का 415 शहीदी वा गुरपूर्व बड़े ही श्रद्धा एम सादगी के साथ मनाया गया सभी सिख संगत ने अपने घरों में ही रह गुरु जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए सुखमणि साहब का पाठ किया गया आनंद साहब का पाठ कर और कोरोना सेदिवंगत हुए लोगों के लिए भी उनकी आत्मा की शांति के लिएओर सरबत का भला अर्थात समस्त मानव जगत की भलाई के लिए एवं पूरी तरह कोरो ना मुक्ति के लिएअरदास की गई और इसके बचाव के लिए जो योद्धा अपनी सेवाएं दे रहे हैं उनको शक्ति प्रदान करने के लिए विशेष अरदास की गई इस अवसर पर अपने सन्देश मे पूर्वांचल सिख वेल फेयर सोसाइटी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सरदार जगबीर सिंह ने कहा पुनीत स्थान अमृतसर पंजाब में जो पवित्र हरिमंदिर साहिब के नाम से विश्व प्रसिद्ध गोल्डन टेंपल बना है जहा प्रतेक दिन लाखो लाखो आम जनमानस दर्शन करने जाता है ओर बीच मे जो मे सरोवर बना है जहा लाखो लोग स्नान कर अपने दुख दूर करते है ओर पवित्र होते है यह सम्पूर्ण सरोवर की स्थापना श्री गुरु अर्जन देव जी ने कराई थी ओर गुरु जी ने है उस समय पानी की कमी को देखते हुए अमृतसर शहर में कई और सरोवर को खुदवाए तरनतारन पंजाब में अपंगो को की सहायता हेतु एक बहुत बड़ा कोड़ी केंद्र बनवाया गुरु अर्जन देव जी कीबड़े ही महान सेवाए है जिसे हम याद करते है सन 1595 में लाहौर में भीषण अकाल पड़ा गुरु अर्जन देव जी अपने परिवार एवं सिख श्रद्धालुओं के साथ जन सेवा हेतु लाहौर पहुंच गए बुरा हाल था अकाल से हुई मौतों तथा तद प्रभाव से हुई बीमारियों के कारण लाहौर शहर में लाशें ही लाशें बिखरी थी वीभत्स दृश्य था गुरु अर्जन जी स्वय आठ महीने तक वहीं लाहौर में रहकर दुखों की सेवा में जुटे रहे लाशों का अंतिम संस्कार बीमारों की चिकित्सा अनाथो असहायो की देखभाल तथा भुखो के लिए लंगर अन्य सेवाओं में तन मन के साथ दसवंद का विधान लगा दिया अकबर बादशाह भी जब लाहौर पहुंचा गुरु जी की सेवा देखकर बहुत प्रभावित हुआ श्री गुरु ग्रंथ साहब जिसके आगे सिक्ख एवंआम जनमानस भी नतमस्तक होता है जिसमें बताया पिता परमेश्वर एक है सब उसकी संतान है इस में सभी धर्मो की बानी समाहित है गुरु जी को बहुत ही कस्ट दिए गए उस समय का बादशाह जो अकबर का पुत्र जहांगीर जो कट्टर इस्लामी शक्तियों के हाथ का खिलौना भी था वह गुरु अर्जन देव की बढ़ती लोकप्रियता इन लोगों की आंखों में चुब्ती थी जबकि गुरुजी सभी की भलाई के लिए कार्य करते रहें एक दिन गुरु जी को लाहौर में लाकर तीन-चार दिन भूखा प्यासा रख के उबलते पानी में बिठाया गया फिर गर्म लोहे की चादर पर बैठाया गया नंगी शरीर पर गरम बालू डाली गई गुरु अपने पिता परमेश्वर में लीन रहे ओर ट्स से म्स नहीं हुए अंत में झुलसे शरीर को लाहौर के निकट से बहने वाली रावी नदी में डुबोया गया इस प्रकार की असहनीय एवं अमानवीय यातनाओं से गुरु जी को शहीद कर दिया गया यह घटना सन 1606 की है गुरु अर्जन देव जी की शहादत सिख धर्म ओर इतिहास की पहली शहीदी थी इसलिए गुरु अर्जन देव जी को शहीदों के सरताज कहा जाता है गुरु जी ने परमात्मा के नाम जाप तथा मनुष्य के उच्च आचरण को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म बताया आज के अवसर पर एक एक कर ने सभी लोगो ने गुरुद्वारा साहिब में माथा भी टेका