बेचैन दिल की दवा बहुत महंगी है ज़माने में -- कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु

 


बेचैन हो गया है अब हर कोई लॉकडाउन में ! 

भला कोरोना वायरस का अंत होगा कब तक !! 

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बेचैन आशिक़ को तसल्ली मिले कैसे ! 

दिल तो घायल है किसी के प्यार में !! 

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बेचैन ज़िंदगी को सुकून की ज़रूरत है !

कुछ ऐसा करो ज़िंदगी नाज़ करे तुम पर !! 

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मैं कैसे कह दूं तुमसे कि बहुत बेचैन हूं मैं ! 

बेचैन दिल की दवा बहुत महंगी है ज़माने में !! 

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हमने तुमसे मोहब्बत का हिसाब क्या मांगा ! 

तुम बेचैन दिल की कहानी सुनाने लगे हमको !! 

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बेचैन होकर भी भला क्या हासिल होगा तुमको !

अच्छा हो ज़िंदगी में लुत्फ़ लेना सीख लो तुम !! 

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बेचैन होकर हासिल कुछ भी नहीं होगा तुमको ! 

हां वैक्सीन लगवा कोरोना को खत्म कर दो तुम !! 

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हर वक्त बेचैनी का पहाड़ा मत पढ़ो तुम ! 

हंसते गाते ज़िंदगी का मजा उठा लो तुम !! 

******************तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु कवि व मंच संचालक अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश !

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