गजलो की महफ़िल दिल्ली की 37 वी कड़ी के मेहमान शायर मासूम गाज़ियाबादी ने शानदार गजलों से महफ़िल में रंग भर दिया,जमकर हुई तारीफ और हौसला अफजाई

 


साहित्य:: वर्तमान कोरोना काल में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काफी विसंगति आ चुकी है, ऐसा लगता है कि ज़िंदगी ठहर सी गयी है! साहित्य का क्षेत्र भी इसके दुष्प्रभावों से अछूता नहीं बचा है। विभिन्न भाषाओं के साहित्य-प्रेमियों और साहित्यकारों द्वारा वर्ष भर चलाये जाने वाले कवि सम्मेलनों, मुशायरों, सम्मान समारोहों समेत हर प्रकार के आयोजनों पर रोक लग गयी है। लेकिन कहते हैं न कि मनुष्य की अदम्य जीजिविषा उसे हर परिस्थिति का अनुकूलन करने में सक्षम बना देती है, सो हम सबने इस भीषण अवसाद की घड़ी में भी ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीने के लिये नये-नये रास्तों की तलाश कर ली है। ज़िंदगी की इसी खोज़ का परिणाम है कि नवीन संचार माध्यमों का सहारा लेकर हम अपने-अपने घरों में क़ैद होते हुये भी वेबीनार या साहित्य-समारोहों का आयोजन कर रहे हैं। इसीलिए हम देख पा रहे हैं कि पिछले कुछ महीनों से साहित्यिक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के निमित्त फेसबुक लाइव एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। फेसबुक लाइव के माध्यम से हम अपने पसंदीदा कवियों-शायरों से रूबरू होकर उनकी रचनाओं का रसास्वादन कर रहे हैं ।

इसी क्रम में साहित्य और संस्कृति के संवर्धन में लगी हुई ऐतिहासिक संस्था "पंकज-गोष्ठी" भी निरंतर क्रियाशील है। "पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के तत्वावधान में चलने वाली प्रख्यात साहित्यिक संस्था "गजलों की महफ़िल (दिल्ली)" भी लगातार आनलाइन मुशायरों एवं लाइव कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

"पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के अध्यक्ष डाॅ विश्वनाथ झा ने हमारे संवाददाता को बताया कि "न्यास" की ओर से हम भारत के विभिन्न शहरों में साहित्यिक और साँस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसी क्रम में "ग़ज़लों की महफिल (दिल्ली)" की ओर से आयोजित "लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)" में शायरों के अलावा ग़ज़ल गायकों को भी सप्ताह में एक दिन आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया, ताकि पटल के शायरों की ग़ज़लों को स्वर बद्ध कर करके ग़ज़ल प्रेमियों तक पहुँचाया जा सके, साथ ही साथ नामचीन ग़ज़लकारों की ग़ज़लों को भी सुना सके। 

अतः 12 दिसंबर 2020 से यह प्रख्यात संस्था "ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)", अपने लाइव कार्यक्रम श्रृंखला के पांचवे चरण में प्रवेश कर गयी है।

इस पांचवे चरण के कार्यक्रम में लाइव @ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की 37 वीं प्रस्तुति के रूप में शनिवार ,12 दिसंबर, 2020, शाम 4 बजे से जिला गाज़ियाबाद (गौतम बुद्ध नगर) उत्तर प्रदेश के प्रख्यात शायर मासूम गाजियाबादी जी ने अपनी ख़ूबसूरत और धारदार ग़ज़लें सुनाकर आज की शाम को एक यादगार शाम बना दिया। ग़ज़ल की बारीकियों को ध्यान में रखते हुई कहीं गयी आज के दौर में शायर मासूम गाजियाबादी जी की ग़ज़लों ने तो जादू ही कर दिया तथा सबको गालिब मीर दाग साहब की याद दिलाते हुए और लगभग घंटे भर बाँधे रखा रखा।

ठीक 4 बजे मासूम गाजियाबादी जी जी पटल पर उपस्थित हो गए और तबसे लगभग घंटे भर तक वे एक से बढ़कर एक बेहतरीन ग़ज़लें सुनाते रहे।

आज की हिन्दुस्तानी ग़ज़लों की बारीकियों और अरुज का ध्यान रखते हुए शायर मासूम गाजियाबादी जी द्वारा सुनायी गई कुछ ग़ज़लें ही उनकी मेयार की गवाही दे देतीं हैं:

छोडा नहीं था दर कोई फ़रियाद के लिए 

माँगी न जहाँ मिन्नतें औलाद के लिए ।।

वो बदनसीब बाप ही बेटों के सामने 

बाँधे खड़ा है हाथ अब इमदाद के लिए ।।

और

इमारत इसलिए ख़ामोश है बस 

कि सच की पीठ में खज़र लगा है ।।

किसी के हाथ की कारीगरी है 

किसी के नाम का पत्थर लगा है ।।

ने जैसे महफ़िल में समां बांध दिया

जो ख़ैमों से बंधे लोगों के दिल भी जोड देते हैं 

हक़ीक़त में फ़रिश्तों को वे पीछे छोड़ देते हैं ।।

अगर ग़ुस्से में हों बच्चे तो ख़ुश करके सुला देना 

चराग़ों को कई नादान जलता छोड देते हैं ।।

तथा

हमारे गाँव में जब भी कभी दो लोग लडते हैं 

तो कोई तीसरा आकर उन्हें समझा-बुझाता है।।

तुम्हारे शहर का लेकिन मियाँ दस्तूर उलटा है 

यहाँ वो तीसरा बस फोन से फिल्में बनाता है।।

सुनाकर श्रोताओं का दिल लूट लिया

परिन्दों जैसा दिल जब से ख़ुदारा कर लिया मैंने 

अना से भूख से ख़ुद ही किनारा कर लिया मैंने।।

न जब देखा गया सैयाद का उतरा हुआ चेहरा 

उतरना एक दाने पर गवारा कर लिया मैंने।।

एवं

अश्कों को यहाँ जिनके दामन भी नहीं मिलता 

वो रोएं तो तुम उनको सीने से लगा लेना।।

दुश्मन की भी बेटी की इज़्ज़त पे जो आँच आए 

अफ़वाह नहीं हमदम सच को भी दबा लेना।।

ने साबित किया कि मासूम जी की तरह उनकी गजलें भी बहुत मासूम है

कहने का आशय कि शायर मासूम गाजियाबादी जी की ग़ज़लों की धार ही अलग है। शायर मासूम गाजियाबादी जी को ग़ज़ल पढ़ते हुए सुनना, ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) में उपस्थित सभी श्रोताओं के लिये एक नया अनुभव था। उनकी ग़ज़लों को सुनकर तो श्रोतागण भावविभोर हो गये। उनकी वाह-वाह के साथ तारीफ़ की झड़ी लग गयी।उनकी धारदार ग़ज़लों से महफ़िल का वातावरण बेहद जीवंत हो गया और बार-बार पेज पर तालियों की बौछार होती रही तथा कैसे एक घंटे बीत गए पता ही नहीं चला। मंत्रमुग्ध होकर हम सभी प्रख्यात मोहतरम शायर मासूम गाजियाबादी जी को सुनते रहे, पर दिल है कि भरा नहीं।

इस तरह कहा जा सकता है कि अपनी धारदार और बेहतरीन ग़ज़लें सुनाकर शायर मासूम गाजियाबादी जी ने सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया, यानी कि महफ़िल लूट ली।

शायर मासूम गाजियाबादी जी के फ़ेसबुक लाइव देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें 

https://m.facebook.com/groups/1108654495985480/permalink/1574327446084847/

   लाइव@ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के नाम से चर्चित फेसबुक के इस लाइव कार्यक्रम की विशेषता यह है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले से ही, शाम 4 बजे से ही दर्शक-श्रोता पेज पर जुटने लगते हैं और कार्यक्रम की समाप्ति तक मौज़ूद रहते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ, महफ़िल की 37वीं कड़ी के रूप में शायर मासूम गाजियाबादी जी जब तक अपना कलाम सुनाते रहे, रसिक दर्शक और श्रोतागण महफ़िल में जमे रहे।

"पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत) द्वारा आयोजित "लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)" के इस कार्यक्रम का समापन टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ओर से डाॅ अमर पंकज जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

कार्यक्रम के संयोजक और ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के एडमिन डाॅ अमर पंकज ने लाइव प्रस्तुति करने वाले शायर मासूम गाजियाबादी जी के साथ-साथ दर्शकों-श्रोताओं के प्रति भी आभार प्रकट करते हुए सबों से अनुरोध किया कि महफ़िल के हर कार्यक्रम में ऐसे ही जुड़कर टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) का उत्साहवर्धन करते रहें।

डाॅ अमर पंकज ने टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के सभी साथियों, डाॅ दिव्या जैन जी , डाॅ यास्मीन मूमल जी, श्रीमती रेणु त्रिवेदी मिश्रा जी, श्री अनिल कुमार शर्मा 'चिंतित' जी, श्री पंकज त्यागी 'असीम' जी और डाॅ पंकज कुमार सोनी जी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करते हुए उन्हें इस सफल आयोजन-श्रृंखला की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित की। 

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