हार-जीत की कोशिश में जंग अभी तक कायम है -- कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु

जीत हमारी मुश्किल लेकिन हार तुम्हारी निश्चित है ! 


हार-जीत की कोशिश में जंग अभी तक कायम है !! 


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मैं तुम्हारी जीत का किस्सा बन जाऊंगा एक दिन ! 


मगर तुम भरोसा रखो मुझ पर पूरे इत्मीनान से !! 


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तुम्हारे जीत की कहानी और भी रोचक हो जाती ! 


काश तुम्हारा अस्त्र-शस्त्र तैयार होता पहले से !! 


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मेरी वीरता का इतिहास यह सारा शहर जानता है !


तुम्हारे शहर की मिट्टी में मेरे खून के छींटे शामिल हैं !! 


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ज़िंदगी है तो कभी हार होगी और कभी जीत ! 


जीत और हार का अंत होना ही मौत का घर है !!


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हमारी कोशिश का नतीजा इस मोड़ पर आ पहुंचा ! 


जीत के करीब जाकर हार का स्वाद चखा है मैंने !! 


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कोई ज़रूरी नहीं जीत कर ही आप मुस्कुराएं ! 


कभी - कभी हारने के बाद भी मुस्कुराया करो !! 


****************** तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु कवि व मंच संचालक अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश !


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