ग़ज़लों की महफ़िल(दिल्ली) की 31 वी कड़ी में बिहार की शायरा अनीता मिश्रा सिद्धि ने बेहतरीन ग़ज़लों से महफ़िल लूटा,लोगों ने जमकर की तारीफ़ और हौसला अफजाई

साहित्य:: वर्तमान कोरोना काल में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काफी विसंगति आ चुकी है, ऐसा लगता है कि ज़िंदगी ठहर सी गयी है! साहित्य का क्षेत्र भी इसके दुष्प्रभावों से अछूता नहीं बचा है। विभिन्न भाषाओं के साहित्य-प्रेमियों और साहित्यकारों द्वारा वर्ष भर चलाये जाने वाले कवि सम्मेलनों, मुशायरों, सम्मान समारोहों समेत हर प्रकार के आयोजनों पर रोक लग गयी है। लेकिन कहते हैं न कि मनुष्य की अदम्य जीजिविषा उसे हर परिस्थिति का अनुकूलन करने में सक्षम बना देती है, सो हम सबने इस भीषण अवसाद की घड़ी में भी ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीने के लिये नये-नये रास्तों की तलाश कर ली है। ज़िंदगी की इसी खोज़ का परिणाम है कि नवीन संचार माध्यमों का सहारा लेकर हम अपने-अपने घरों में क़ैद होते हुये भी वेबीनार या साहित्य-समारोहों का आयोजन कर रहे हैं। इसीलिए हम देख पा रहे हैं कि पिछले कुछ महीनों से साहित्यिक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के निमित्त फेसबुक लाइव एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। फेसबुक लाइव के माध्यम से हम अपने पसंदीदा कवियों-शायरों से रूबरू होकर उनकी रचनाओं का रसास्वादन कर रहे हैं ।


इसी क्रम में साहित्य और संस्कृति के संवर्धन में लगी हुई ऐतिहासिक संस्था "पंकज-गोष्ठी" भी निरंतर क्रियाशील है। "पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के तत्वावधान में चलने वाली प्रख्यात साहित्यिक संस्था "गजलों की महफ़िल (दिल्ली)" भी लगातार आनलाइन मुशायरों एवं लाइव कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।


"पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के अध्यक्ष डाॅ विश्वनाथ झा ने हमारे संवाददाता को बताया कि "न्यास" की ओर से हम भारत के विभिन्न शहरों में साहित्यिक और साँस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसी क्रम में "ग़ज़लों की महफिल (दिल्ली)" की ओर से आयोजित "लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)" के लाइव कार्यक्रम में पवित्र शारदीय नवरात्र की प्रथम तिथि, प्रतिपदा से कुछ परिवर्तन लाया गया है तथा इस कार्यक्रम श्रृंखला को एक नया रूप देते हुए आज से शुरु हुए चौथे चरण को "मातृ शक्ति" को समर्पित किया गया है। लाइव @ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के इस चतुर्थ चरण को "मातृ-शक्ति" को समर्पित करते हुए स्त्री-सशक्तिकरण की दिशा में अदब की दुनिया में महफ़िल की ओर से किये गए इस छोटे परंतु महत्वपूर्ण प्रयास के तहत यह निर्णय लिया गया है कि चतुर्थ चरण में सिर्फ़ शायरात को महफ़िल का मंच प्रदान किया जायेगा।


इसी क्रम में चतुर्थ चरण के आज से शुरु हुए कार्यक्रम में लाइव @ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की 31 वीं प्रस्तुति के रूप में, आज रविवार,17 अक्टूबर 2020, शाम 4 बजे से पटना(बिहार) की शायरा श्री मती अनीता मिश्रा सिद्धि जी ने महफ़िल के पटल पर अपनी ख़ूबसूरत ग़ज़लें सुनाई और आज की शाम को एक यादगार शाम बना दिया। उन्होंने सबको लगभग घंटे भर बाँधे रखा रखा।



ठीक 4 बजे अनीता मिश्रा सिद्धि जी जी पटल पर उपस्थित हो गई, लेकिन तकनीकी व्यवधान के कारण लगभग 20 मिनट बाद उनका कार्यक्रम अचानक खत्म हो गया। लेकिन वे पुनः पटल पर लाइव हुईं और अगले 40 मिनटों तक ख़ूबसूरत क़लाम सुनातीं रहीं। इस तरह कुल मिलाकर लगभग घंटे भर तक वे एक से बढ़कर एक बेहतरीन ग़ज़लें सुनातीं रहीं ।


जब उन्होंने अपनी ग़ज़ल:


 ग़ज़ल


समय की धार को देखो कहानी क्या सुनाती है।


कभी बेहद हँसाती है कभी बेहद रुलाती है।।


कहे ये लेखनी मेरी सदा तुम सत्य ही लिखना-


समय के साथ ही चलकर कलम भी मुस्कुराती है।


सुनाया तो महफ़िल में लोग झूम उठे फिर अनीता जी की इस ग़ज़ल:


रिश्ता सारा भूला दिया तूने ।


जीते जी ही मिटा दिया तूने ।।


बोल कैसे यकीं कर ले भला -


दोस्त बनकर दग़ा दिया तूने।।


 ने तो लोगो को सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि अनीता मिश्रा सिद्धि जी हिंदी उर्दू की गजलों में पूर्णतया पारंगत है फिर इस ग़ज़ल ने तो


बेसबब मुस्कुराने से क्या फायदा।


जख्म अपना छिपाने से क्या फायदा।।


मानते ही नहीं जब यहां सच कोई-


फिर उन्हें सच बताने से क्या फायदा।।


की भावनाओ में जैसे खो गए आगे अनीता मिश्रा सिद्धि जी की इस खूबसूरत ग़ज़ल:


ढल गया दिन जरा सोचते-सोचते।


फासला भी बढ़ा सोचते-सोचते।।


आइना देखकर मुस्कुराता रहा- 


प्यार मेरा छला सोचते सोचते।।


की भी काफ़ी सराहना हुई। और इन गजलों से तो महफ़िल उरूज पर पहुंच गई


 आपने हमसे हमारी हर निशानी छीन ली ।


अब भला कैसे जिएं हम शादमानी छीन ली।।


आज देखा रो रहे थे रास्ते में कुछ गरीब-


आदमी ने आदमी से जिंदगानी छीन ली।।


और


रुला कर हमें जो हंसाने लगे हैं।


वही प्यार फिर से दिखाने लगे हैं।।


उन्हें देखकर चाँद छिपने चला है ,


वो छत पर नज़र जब से आने लगे हैं।।


सच कहें तो आदरणीय अनीता मिश्रा सिद्धि जी द्वारा पढ़ी गयी धारदार ग़ज़लों से महफ़िल का वातावरण बेहद जीवंत हो गया और बार-बार पेज पर तालियों की बौछार होती रही तथा कैसे एक घंटे बीत गए पता ही नहीं चला। मंत्रमुग्ध होकर हम सभी उन्हें जी भर के सुनते रहे, पर दिल है कि भरा नहीं। 


इस तरह कहा जा सकता है कि अपनी धारदार शैली में अपनी बेहतरीन ग़ज़लें सुनाकर अनीता मिश्रा सिद्धि जी ने सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया, यानी कि महफ़िल लूट ली।


 शायरा अनीता मिश्रा सिद्धि जी के फ़ेसबुक लाइव देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें 


https://www.facebook.com/groups/1108654495985480/permalink/1526694797514779/


एवं


https://www.facebook.com/groups/1108654495985480/permalink/1526705657513693/


   लाइव@ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के नाम से चर्चित फेसबुक के इस लाइव कार्यक्रम की विशेषता यह है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले से ही, शाम 4 बजे से ही दर्शक-श्रोता पेज पर जुटने लगते हैं और कार्यक्रम की समाप्ति तक मौज़ूद रहते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ, महफ़िल की 31 वीं कड़ी के रूप में अनीता मिश्रा सिद्धि जी जब तक अपनी गजलें रहे, रसिक दर्शक और श्रोतागण महफ़िल में जमे रहे।


 


"पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत) द्वारा आयोजित "लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)" के इस कार्यक्रम का समापन टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ओर से डाॅ अमर पंकज जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



कार्यक्रम के संयोजक और ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के एडमिन डाॅ अमर पंकज ने लाइव प्रस्तुति करने वाले शायरा अनीता मिश्रा सिद्धि जी के साथ-साथ दर्शकों-श्रोताओं के प्रति भी आभार प्रकट करते हुए सबों से अनुरोध किया कि महफ़िल के हर कार्यक्रम में ऐसे ही जुड़कर टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) का उत्साहवर्धन करते रहें।


डाॅ अमर पंकज ने टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के सभी साथियों, डाॅ दिव्या जैन जी , डाॅ यास्मीन मूमल जी, श्रीमती रेणु त्रिवेदी मिश्रा जी, श्री अनिल कुमार शर्मा 'चिंतित' जी, श्री पंकज त्यागी 'असीम' जी और डाॅ पंकज कुमार सोनी जी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करते हुए उन्हें इस सफल आयोजन-श्रृंखला की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित की।


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