लखनऊ/ यूपी: रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर मेहरबान उत्तर प्रदेश सरकार, इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सरकार से पूछी मुक़दमा वापस लेने की वज़ह


रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर मेहरबान उत्तर प्रदेश सरकार से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार से रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिए जाने की वजह पूछी है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ये भी कहा है कि अगर मुकदमे वापसी के संतोषजनक कारण सामने नहीं आए तो, कोर्ट मामले में स्वतः संज्ञान में लेकर इसका परीक्षण करेगी.


रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का जन्म 31 अक्टूबर, 1967 को प्रतापगढ़ के भदरी रियासत में हुआ है. महज 24 साल की उम्र में अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले राजा भैया ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना चुनाव जीता था. अगले बार जब वे चुनाव लड़ रहे थे, तब उनके खिलाफ प्रचार करने मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कुंडा पहुंचे. कल्याण सिंह ने वहां कहा था, गुंडा विहीन कुंडा करौं, ध्वज उठाय दोउ हाथ. लेकिन बीजेपी उम्मीदवार राजा भैया से चुनाव हार गया.


कुंडा को 'गुंडामुक्त' कराने का नारा देने वाले कल्याण सिंह ने बाद में राजा भैया को अपने ही मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया. मायावती ने जब कल्याण सरकार से समर्थन वापस लिया था, उस समय राजा भैया ने सरकार बचाने में कल्याण की बहुत मदद की थी. बाद में मायावती की सरकार बनी. उन्होंने अपने शासनकाल में राजा भैया पर पोटा कानून के तहत केस दर्ज करके जेल भेज दिया था.


।।नरेन्द्र पंडित।।


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