कोरोना संकट के दौरान ऐसे रखें अपने बच्चों का ध्यान


पहले आपके बच्चे से आपका मिलना कम हो पाता होगा, क्योंकि संभवतः आप ऑफिस चले जाते होंगे और जब तक आते होंगे तब तक आपका बच्चा सो चुका होता था। लेकिन अब तो 24 घंटे आप उसकी नजरों के सामने हैं। ऐसे में उसका मन मस्तिष्क आपके व्यवहार को बारीकी से जांचता- परखता और अपनाता है।


पहले विद्यालयों में बच्चे जाते थे और शिक्षकों के माध्यम से, अपने सहपाठियों के माध्यम से वह काफी कुछ सीखते थे। पर कोरोना वायरस के समय में स्थिति ऐसी आ गई है कि विद्यार्थी 24 घंटे अपने घर पर रहने को विवश हैं। हालांकि, कुछ स्कूलों द्वारा ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से शिक्षा देने की कोशिश अवश्य ही की जा रही है, किंतु सच्चाई तो यही है कि बच्चे केवल शिक्षा से सीखने की बजाय, स्कूली माहौल से अधिक सीखते रहे हैं। 


फ़िलहाल तो उनके घर का माहौल उनके मन मस्तिष्क पर 100 फ़ीसदी प्रभाव छोड़ रहा है।


ऐसे में जरूरी है कि प्रत्येक मां-बाप बेहद संतुलित व्यवहार अपनाकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दें। उनके व्यवहार को समझें और चिड़चिड़ा बनने की बजाय, उसे ठीक दिशा देने का उपाय करें। आइए देखते हैं कुछ पॉइंट्स...


स्वयं के चरित्र से प्रेरणा दें


पहले आपके बच्चे से आपका मिलना कम हो पाता होगा, क्योंकि संभवतः आप ऑफिस चले जाते होंगे और जब तक आते होंगे तब तक आपका बच्चा सो चुका होता था। 


 


लेकिन अब तो 24 घंटे आप उसकी नजरों के सामने हैं। ऐसे में उसका मन मस्तिष्क आपके व्यवहार को बारीकी से जांचता-परखता और अपनाता है। 


 


क्या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सुबह जगे और आप स्वयं देर सुबह तक सोते रहें? 


 


क्या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा एक्सरसाइज करें और आप खुद कभी इसका इनीशिएटिव नहीं लें?


 


एक तरह से यह असंभव है कि आपका बच्चा सिर्फ आपके कह देने से कुछ सीख लेगा। जाहिर तौर पर आपको अपने चरित्र से शिक्षा देने की आवश्यकता है और जैसा आप व्यवहार करेंगे, यकीन मानिए आपका बच्चा वैसा ही सीखेगा। 


पहले तो थोड़ा बहुत कम, लेकिन कोरोना के समय में 24 घंटे आप ही अपने बच्चे को जाने अनजाने भरपूर शिक्षा दे रहे हैं, इसीलिए स्वयं के व्यवहार के प्रति ज्यादा सचेत रहें।


समय का प्रबंधन


कई बार ऐसा होता है कि हमारे पास समय ही समय होता है, लेकिन उसे हम प्रबंधित नहीं कर पाते और ऐसी स्थिति में हमारे पास समय का अभाव हो जाता है।  


क्या आप भी उनमें से एक हैं और आपको अपने बच्चों के लिए समय नहीं मिल पाता है?  


इसका आशय यह नहीं है कि पूरे 24 घंटे आप अपने बच्चों को डेडीकेटेड समय दें, लेकिन जिस तरह से आप ऑफिस के किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को एक निश्चित और डेडिकेटेड समय देते हैं, ठीक उसी प्रकार अपने बच्चों को भी आपको डेडीकेटेड समय देना चाहिए। ऐसे समय में बच्चे का बाल मन कॉन्फिडेंस से भर जाता है कि उसके लिए भी उसके माता-पिता के पास स्पेसिफिक समय है। इससे वह मानसिक रूप से मजबूत होता है और संवेदनशील बनता है। 


इसीलिए उसके लिए कुछ ही सही, समय अवश्य निकालें और इस समय जब आप 24 घंटे घर पर हैं तो ऐसा करना नामुमकिन तो नहीं ही है। 


किसी हाल में आप अपने बच्चे को टीवी और मोबाइल देकर यथास्थिति पर ना छोड़ें, बल्कि उसके साथ खुद भी संवाद करें, उसके साथ खुद भी खेलें और इसके लिए आप निश्चित समय निकाल सकते हैं।


फैसले लेने में और उसकी क्रिएटिविटी बढ़ाने में मदद करें


ऊपर के दोनों पॉइंट्स में कहा गया है कि खुद के व्यवहार से उसे शिक्षा दें और उसे समय दें, लेकिन इसके खतरे यह हैं कि कई बार आप अपने बच्चे की पर्सनालिटी पर हावी होने लगते हैं।


ऐसा आपको कदापि नहीं करना है और उस पर किसी चीज को थोपना नहीं है, बल्कि खुद उसे फैसले लेने देना है। 


एक उदाहरण दें तो अगर आप एक्सरसाइज करते हैं और उसके करने का आपका एक निश्चित क्रम है तो कोई जरूरी नहीं है कि बच्चा भी उसी क्रम में करें। 


ऐसे में कुछ थोपने की जगह उसे स्वयं से निर्णय लेने दें। इस तरह से उसकी क्रिएटिविटी बढ़ेगी, उसके सोचने की क्षमता बढ़ेगी। इसी प्रकार से अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा घर के कार्यों में आपकी मदद करे, आपका हाथ बंटाए, तो उस पर कोई चीज रूटीन वाइज ना थोपें, बल्कि उसके विकास के लिए, उसको सोचने और समझने की ताकत विकसित करने पर उसे प्रेरित करें। 


ऐसे में आपकी पर्सनालिटी उस पर हावी नहीं होगी और वह आजाद ख्याल और मजबूत होने के साथ-साथ संवेदनशील भी बन सकेगा।


बेशक इस प्रक्रिया में कुछ नुकसान भी होगा, कुछ रिस्क भी है, लेकिन अगर थोड़ा रिस्क उठाकर आपके बच्चे का चरित्र सुदृढ़ होता है तो यह सबसे बड़ी प्राप्ति है जो आपको होने वाली है।


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