पत्रकारों को भी कोरोना वारियर्स का दर्जा दिया जाय ,अंकित गुप्ता *प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपर जिलाधिकारी श्री रमेश चंद्र जी को सौंपा।


बस्ती,अंकित कुमार गुप्ता कंप्यूटर अध्यापक उर्मिला एजुकेशनल एकेडमी,ने पीएम के  


नाम पत्र लिखकर एडीएम बस्ती को सौंपा,पत्र का मजमून निम्न है


सेवा में,
आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री, भारत।


आदरणीय प्रधानमंत्री जी, आपको मेरा सादर प्रणाम,
मैं अंकित कुमार गुप्ता, जनपद बस्ती(उ0प्र0) का निवासी हूँ।आपसे कुछ निवेदन करना चाहता हूँ। आदरणीय प्रधानमंत्री जी आपने सभी संबोधन में कोरोना वैश्विक बीमारी में अक्सर कोरोना वारियर्स में स्वास्थ्य कर्मियों, निकाय कर्मियों और पुलिसबलों को वारियर्स का दर्जा का ज़िक्र किया है जो कि सराहनीय है। शासन-प्रशासन द्वारा दिये गए नियमों का लोग पालन भी कर रहे है। जिसकी देश ही नही पूरा विश्व प्रशंसा कर रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी, भारत का नागरिक होने के नाते मेरे मन मे अक्सर ये ख्याल आता रहता है कि हमें आपके द्वारा दी गयी सभी संदेश हमे मीडिया के माध्यम से ही प्राप्त होता है चाहे प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। मुझे ऐसा लगा की अगर ये पत्रकार न होते तो हमे कोरोना से बचाव, कोरोना के बढ़ते संख्या, बीमारियों से सभी सही हेतु मरीजों का लाइव टेलीकास्ट इनके बिना संभव नही हो सकता। इसलिए मेरा निवेदन हैं कि पत्रकारों को भी कोरोना वारियर्स का दर्जा मिलना चाहिये। चूंकि लोकतंत्र में मीडिया को चतुर्थ स्तंभ माना जाता है । विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को पेंशन की सुविधा है, लेकिन इस चौथे स्तंभ में कार्यरत पत्रकारों को पेंशन की सुविधा नहीं है, उन्हें भी पेंशन की सुविधा से आच्छादित करने का निर्णय लिया जाए। देश में या देश पर कोई भी संकट हो पत्रकार अगले मोर्चे पर जूझता है जनता की खबर सरकार तक और सरकार की खबर जनता तक पहुँचाता है। दायित्वों से भटकने वालों की खबर भी लेता है। इसलिए वह बहुतों को खटकता भी है। इससे उन्हें कई बार इसकी बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ती है और लोकतंत्र में इसी उपयोगिता को देखते हुए मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी कहा जाता है। कोरोना के इस दुष्काल में पत्रकार अग्रिम मोर्चे पर जूझ रहा है। राजधानी, महानगरो, नगरों तक ही नहीं कस्बा, चट्टी और गांव में एक अदद कलम एक अदद मोबाईल, और एक कैमरे के भरोसे हर मोर्चे पर डटा दिखाई देता है। पत्रकारों की व्यथा का उल्लेख यदि किया जाए तो इनमें से बहुतों को वेतन नहीं पुररस्कार और कमीशन के रूप में जीवकोपार्जन के लिए रुपया मिलता है। इसमे बहुत बड़ी संख्या में पत्रकारों को वेजबोर्ड का लाभ नहीं मिलता अपितु प्रबंधन की कृपा पर भुगतान पाते हैं।
कोरोना की इस महामारी से निपटने में स्वास्थ्य कर्मियों, निकाय कर्मियों और पुलिस बलो को कोरोना वारियर्स का दर्जा दिया गया है। जो बहुत ही सराहनीय है। उसी तरह पत्रकारों को भी कोरोना वारियर्स का दर्जा दिया जाय और उन्हें भी बीमा कवर और अन्य सुविधायें दी जायें। पत्रकारों को सेनेटाइजेशन की सुविधा के लिए विधायक निधि की गाइडलाइन में संसोधन किया जाये। ऐसा नहीं है कि कोई पत्रकार का सदस्य मेरे घर से जुड़ा है, लेकिन मेरे मन मे यह विषय आया तो आपसे साझा कर दिया। पत्रकार, बैंककर्मी, पेट्रोलकर्मी, गैस हॉकर आदि का भी नाम आप यदि अपने सम्बोधन में जोड़ देते हैं, तो उनका हौसला और अधिक बढ़ जाएगा। यदि मेरी बात आपको सही लगे तो इन बातों को आप अपने अगले संबोधन में जोड़ने और इस बिंदु पर विचार करने की कृपा करें। यदि मुझसे कोई गलती हो गयी हो पत्र लिखने में तो कृपा क्षमा करें।



धन्यवाद।


आपके देश का नागरिक


अंकित कुमार गुप्ता
कंप्यूटर अध्यापक
उर्मिला एजुकेशनल एकेडमी, बस्ती, उ0प्र0
9026106737


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