गुजरात से आनेवाली श्रमिक ट्रेन से 338 यात्री लापता,1908 ट्रेन में चढ़े,पर यूपी के वांदा में,1570 यात्री उतरे,रेल प्रशासन सकते में,बोले आयुक्त,सूची गलत हो सकती है


यूपी के बांदा पहुंची वडोदरा श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. इस ट्रेन में सवार 1,908 में से 338 लोग चलती ट्रेन से लापता हो गए हैं. अब दो राज्यों का प्रशासन लापता प्रवासी कामगारों की खोजबीन में जुट गया है. 22 सामान्य डिब्बों की यह ट्रेन गुजरात के वडोदरा स्टेशन से मंगलवार को 1,908 प्रवासी मजदूरों को लेकर बांदा के लिए चली थी, जिन्हें वहां बाकायदा स्क्रीनिंग करके ट्रेन में बिठाया गया था.


सभी यात्रियों की जानकारी के साथ इसका एक लेटर अपर कलेक्टर वड़ोदरा डीआर पटेल द्वारा स्थानीय प्रशासन को भेजा गया था. जब ट्रेन बांदा पहुंची तो 1,908 की बजाय 1,570 लोग ही बांदा उतरे. चलती ट्रेन से लोग नदारद दिखे हैं, ऐसे में प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. रेलवे प्रशासन सकते में है.


वडोदरा से सवार 1,908 मजदूरों में से सिर्फ 1,570 यात्री ही बुधवार सुबह बांदा रेलवे स्टेशन पर उतरे. बाकी 338 लोग कहां लापता हैं, इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता. दावा किया जा रहा था कि पुख्ता स्वास्थ्य जांच और पड़ताल के बाद ही श्रमिकों को ट्रेनों से उनके गृह राज्यों में भिजवाया जा रहा है. बांदा प्रशासन इस संबंध में गुजरात प्रशासन से संपर्क कर गुमशुदा यात्रियों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है.
गुजरात से बांदा रवाना हुई थी ट्रेन
गुजरात के वडोदरा शहर से मंगलवार को 22 डिब्बों की एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन बांदा के लिए रवाना हुई थी, जिसमें गुजरात प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई सूची के अनुसार उत्तर प्रदेश के 48 जिलों के 1908 यात्री स्वास्थ परीक्षण के बाद सवार हुए थे. नॉन स्टॉप ट्रेन का रास्ते मे कोई ठहराव नहीं था और यह बुधवार सुबह सीधे बांदा रेलवे स्टेशन आकर रुकी, जिसमें गिनती के बाद सिर्फ 1570 यात्री ही उतरे पाए गए.


मंडलायुक्त गौरव दयाल ने 'संवाददाता' को बताया कि वडोदरा-बांदा श्रमिक स्पेशल ट्रेन में बुधवार को यहां 48 जिलों के 1570 लोग उतरे, जबकि भेजी गई सूची में 1908 यात्रियों की जानकारी थी. पहुंचे लोगों की स्क्रीनिंग कर उन्हें विभिन्न जनपदों के लिए रवाना कर दिया गया.
सूची हो सकती है गलत
गायब यात्रियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि "हम वहां के प्रशासन से इस संबंध में संपर्क कर जानकारी जुटा रहे हैं. हो सकता हो कि वह लोग वहां से ट्रेन में सवार ही ना हुए हों या तो सूची में ही गलतियां हों."


एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि 22 डिब्बों की ट्रेन में 1908 लोगों को वैसे भी मानक के अनुसार नहीं बिठाया जा सकता, इस बात की संभावना अधिक है कि सूची बनाने में चूक हुई हो, फिर भी हम इसकी पड़ताल करवा रहे हैं.


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