पालघर:-कैसे एक अफ़वाह के कारण पूरी भीड़ साधुओं की कातिल बन गई,जानिए पूरी कहानी, क्यो तीन लोगों को चोर समझकर मार डाला


पालघर की घटना पर महाराष्ट्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. घटना को लेकर तीन दिनों से सियासी घमासान चल रहा है. लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने साफ कर दिया कि इस मामले को साम्प्रदायिक रंग देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. राज्य सरकार ने साफ किया कि यह वारदात आदिवासियों के गांव में हुई है, जो चोर और डाकुओं की अफवाह उड़ने के बाद खुद अपने गांव की चौकीदारी कर रहे थे. आपको बताते हैं कि आखिरी कैसे हुई ये घटना और घटना के बाद अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ?



- पालघर जिले के दाभडी खानवेल रोड स्थित ग्रामीण इलाके में चोर डाकुओं के घुस आने अफवाह ज़ोर पकड़ रही थी. ग्रामीण खुद अपने गांव की पहरेदारी कर रहे थे.


- 15 अप्रैल की शाम ग्रामीणों ने एक सरकारी मेडिकल टीम को चोर समझकर हमला कर दिया था. उस टीम में पुलिस इंस्पेक्टर काले, एक डॉक्टर और तीन पुलिसकर्मी शामिल थे. बमुश्किल उन लोगों ने ग्रामीणों से अपनी जान बचाई थी.


- 16-17 अप्रैल की दरमियानी रात दाभडी खानवेल रोड के आदिवासी गांव गड़चिनचले गांव में लोग पहरेदारी कर रहे थे. उसी रात एक कार गांव में पहुंची, जिसमें दो साधु सवार थे.


- महाराष्ट्र पुलिस के मुताबिक कार गांव में आते देख ग्रामीण सतर्क हो गए. उन्होंने कार रुकने का इशारा किया लेकिन कार नहीं रुकी तो भीड़ ने उस कार पर पथराव शुरू कर दिया. कार चालक ने अपने मोबाइल से पुलिस को सूचना दी.


- मगर जैसे ही कार वहां रुकी, तो भीड़ ने उन तीनों लोगों को कार से उतारकर लाठी डंडों से पीटना शुरू कर दिया. इससे पहले कि कार सवार लोग कुछ बताते या समझाते, गांव वालों ने उन्हें चोर डाकू समझकर बहुत पीटा.


- जब ग्रामीण उन तीनों लोगों को पीट रहे थे, तभी पुलिस मौके पर जा पहुंची. पुलिस ने ग्रामीणों को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन भीड़ कुछ समझने को तैयार नहीं थी. भीड़ ने पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया.


- इस हमले में कासा पुलिस स्टेशन के अधिकारियों के अलावा जिले के एक सीनियर पुलिस अधिकारी भी घायल हो गए. कुल मिलाकर इस घटना में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए. पुलिस के एक वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया.


- इस दौरान भीड़ के हत्थे चढ़े तीनों कार सवार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. मरने वालों में दो साधु और उनका एक ड्राइवर शामिल था. बाद में मौके पर भारी पुलिस बल बुलाया गया. तब तीनों शव कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भिजवाए.


- गड़चिनचले गांव की इस घटना की सूचना जंगल में आग की तरह फैल गई. विपक्षी दलों ने ठाकरे सरकार को घेरना शुरू कर दिया. इसके बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बयान जारी कर कहा 'मॉब लिंचिंग की जो घटना हुई है, वहां पर तीन लोग बिना इजाजत दूसरे राज्य में जा रहे थे. उन्होंने मेन रोड से ना जाकर ग्रामीण सड़क से जाने की कोशिश की, वहीं पर ग्रामीणों ने उनको पकड़ लिया. गांव वालों को लगा कि वे शायद चोरी करने आए हैं, इसकी वजह से उन पर हमला हुआ और तीनों लोगों की मौत हो गई.'


- पुलिस के मुताबिक ग्रामीणों ने उन तीनों लोगों की मॉब लिंचिंग उस समय की, जब वे लोग नासिक की ओर जा रहे थे. इनमें से एक ड्राइवर था, जबकि दो साधु थे. जो मुंबई के रहने वाले बताए जा रहे हैं. मृतकों की पहचान सुशीलगिरी महाराज, नीलेश तेलगड़े और जयेश तेलगड़े के रूप में हुई है.


- घटना के बाद बीजेपी ने सरकार पर हमला तेज कर दिया. देशभर से बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया आने लगी. भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर और साक्षी महाराज जैसे नेताओं ने इस मामले को सनातन धर्म पर हमला करार दिया. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार से कठोर कार्रवाई की मांग की.


- राज्य के मुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे ने घटना को लेकर कहा कि ये हिंदू-मुस्लिम जैसा कोई मामला नहीं है, इस बारे में मेरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी बात हुई है. हर किसी को इस बारे में समझाया गया है कि ये धर्म से जुड़ा मामला नहीं है, लेकिन जो भी सोशल मीडिया के जरिए आग लगाने और मामला भड़काने की कोशिश करेगा उस पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा.


- सरकार घटना के फौरन बाद एक्शन में आ गई. गांव में दबिश देकर 101 लोगों को गिरफ्तार किया गया. सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की गई.


- विपक्षी दल के कुछ नेताओं ने इस मामले को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की तो महाराष्ट्र सरकार ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए. जांच की कमान आईजी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई.


- राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ट्वीट करते हुए बताया कि मुंबई से सूरत जाने वाले 3 लोगों की पालघर में हुई हत्या के बाद मेरे आदेश से इस हत्याकांड में शामिल 101 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया है. साथ ही उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं. इस घटना को विवादास्पद बनाकर समाज में दरार बनाने वालों पर भी पुलिस नज़र रखेगी.


- सोशल मीडिया में घटना को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश के दौरान राज्य के गृह मंत्री देशमुख ने ट्वीट कर बताया कि हमला करने वाले और जिनकी इस हमले में जान गई है, दोनों अलग धर्म के नहीं हैं. बेवजह समाज में सोशल मीडिया द्वारा धार्मिक विवाद का निर्माण करने वालों पर पुलिस और महाराष्ट्र साइबर सेल को कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं.


- मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में नहीं बख्शेंगे. साथ ही लापरवाही के आरोप दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है. एक हाईलेवल कमेटी मामले की जांच कर रही है.


- साधुओं की मॉब लिंचिंग से पहले की शाम पुलिस इंस्पेक्टर काले, एक डॉक्टर और तीन पुलिसकर्मियों पर ग्रामीणों ने हमला किया था. इसके बाद भी पुलिस की ओर से जरूरी कदम नहीं उठाए गए. न तो अफवाहों को रोकने की कोशिश की और न ही ग्रामीणों की अवैध पहरेदारी को हटाया गया. अगर उस वक्त कार्रवाई की गई होती तो शायद साधुओं के साथ घटना नहीं होती.


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