अकूत संपत्ति का मालिक है मो साद,2000 करोड़ से ज्यादा है संपत्ति, ईडी की जांच में खुलासा



नई दिल्ली, वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर देश को बड़ी मुसीबत में डालने वाले तब्लीगी जमात के मुखिया मौलाना मुहम्मद साद ने अकूत जायदाद बनाई है। सूत्र बताते हैं कि वह दो हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित कर चुका है। हालांकि 27 दिन बाद भी उसकी गिरफ्तारी को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। पुलिस आयुक्त लेकर क्राइम ब्रांच के बड़े अधिकारी तक चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय के निर्देश मिलने के बाद ही पुलिस साद और मरकज प्रबंधन से जुड़े अन्य मौलानाओं की गिरफ्तारी संबंधी कोई कदम उठाएगी।


चंद सालों मे जमा की बेशुमार दौलत


जानकार बताते हैं कि अपने चाचा की मृत्यु के बाद मरकज की गद्दी पर काबिज होते ही साद ने चंद सालों में बेशुमार दौलत अर्जित कर ली।


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मुकदमा दर्ज किए एक सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। क्राइम ब्रांच और ईडी की चुप्पी को लेकर कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं।





मौलाना साद जाकिर नगर में क्वारंटाइन!


सबसे बड़ा सवाल साद की मौजूदगी को लेकर है। उसके अधिवक्ता वीडियो वायरल कर दावा कर रहे हैं कि मौलाना साद जाकिर नगर में क्वारंटाइन है। अगर यह सही है तो क्राइम ब्रांच उसको गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है। इसके उलट वह उत्तर प्रदेश के शामली स्थित फार्म हाउस और निजामुद्दीन स्थित मरकज में छापे मार रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि साद की गिरफ्तारी पर दंगे भड़कने की आशंका से सरकार अभी कोई कदम नहीं उठा रही। कोरोना के खिलाफ लड़ाई के बीच वह कोई और मोर्चा नहीं खोलना चाहती। हालांकि मरकज को लेकर शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक बड़े अधिकारी के साथ आला पुलिस अधिकारी की गोपनीय चर्चा होने की बात बताई जा रही है।


साद के वकील का दावा, कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आई


सूत्रों के मुताबिक, साद के वकील ने एक टीवी चैनल को बताया है कि पुलिस के कहने पर साद ने कोरोना टेस्ट करा लिया है। रिपोर्ट नेगेटिव आई, जो पुलिस को सौंप दी गई है। मनी लांड्रिंग के आरोप पर वकील का कहना है कि मरकज किसी से आर्थिक सहायता व दान नहीं लेता है। यहां लोग निश्शुल्क आते हैं और आने-जाने का खर्च खुद उठाते हैं। वकील ने तो ईडी का नोटिस मिलने से भी इन्कार किया। हालांकि वकील के दावे पर खुद सवाल उठ रहे हैं। अगर दान व आर्थिक मदद नहीं ली जाती तो निजामुद्दीन स्थित बैंक ऑफ इंडिया में मरकज के खाते में रोज कहां से पैसे जमा किए जाते थे? बैंक प्रबंधक रविंद्र को क्यों इसका संज्ञान लेना पड़ा और उसने केयर टेकर जावेद को साद को बैंक लेकर आने को कहा था। क्राइम ब्रांच के अधिकारी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट के सवाल को तो सिरे से खारिज कर रहे हैं, लेकिन दूसरे मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं।


 




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