शहीद दिवस पर कवियों ने अपनी रचनाओं से शहीदों को दी श्रद्धांजलि,तिरंगे पर कभी जो आंच आए मंज़ूर नहीं हमको – तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु

 

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सरदार भगतसिंह और उनके साथियों के शहादत दिवस पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा जनपद इकाई अम्बेडकर नगर के तत्वावधान में अखिल भारतीय आनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। संस्था के संयोजक कौशल सिंह सूर्यवंशी , अध्यक्ष तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु व कोषाध्यक्ष संजय सवेरा ने सभी कवियों का स्वागत किया। तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु के संचालन में अभिषेक त्रिपाठी द्वारा वाणी वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। फिर कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधते हुए अपनी रचनाओं को पढ़ा। डॉ करूणा वर्मा ने पढ़ा – घाटी की वादियों में निडर सैनिकों के , अफसाने कैसे तुम्हें हम सुनाएं , कभी फुर्सत में आओ मिलो साथ बैठो , तो उनकी तुम्हें हम कहानी सुनाएं। अभिषेक त्रिपाठी ने पढ़ा –शौर्य का दिनकर इन्हीं से तेज बल पाता रहा , मैं इन्हीं की ही कहानी रात भर गाता रहा। कौशल सिंह सूर्यवंशी ने पढ़ा – चढ़ गए फांसी पर बोलकर जिंदाबाद , नम हुई आंखें तब पूरे हिन्दुस्तान की। संजय सवेरा ने पढ़ा – खुद ही खुद में बुनने उजड़ने लगा हूं , शायद अपनी जड़ों से जुड़ने लगा हूं , मैं तो खड़ा हूं अपनी ही जमीन पर , लोगों को लगता है मैं उड़ने लगा हूं। गौतम राजभर ने पढ़ा–मेरे महबूब मुझे अपने तक ही सीमित रखना सिर्फ मेरे लिए ही सम्भावनाएं असीमित रखना। तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु ने पढ़ा– हमारे राष्ट्र की अस्मिता में तिरंगे की शान है शामिल ! तिरंगे पर कभी जो आ जाए मंज़ूर नहीं यह हमको !! कार्यकारिणी सदस्य डाक्टर संतराम पांडेय मैं अपने जोशीली रचनाओं से लोगों को आह्लादित किया ! अंत में अध्यक्ष व संचालक जिज्ञासु द्वारा सभी कवियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया !