उत्तर प्रदेश में COVID-19 के कारण अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों से जुड़ी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं पर समझ बनाने हेतु राज्य स्तरीय परिचर्चा का हुआ आयोजन


उत्तर प्रदेश में COVID-19 की महामारी ने लोगों और बच्चों के जीवन पर भारी बुरा असर डाला, कई बच्चों ने अपने दोनों माता-पिता या किसी एक को खो दिया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों को मदद करने हेतु उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की घोषणा की. आज इस महत्वपूर्ण योजना पर समझ बनाने एवं इसकी व्यापक जागरूकता हेतु HCL अकैडमी के तहत उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मार्गदर्शन में HCL फाउंडेशन के सहयोग से चेतना संस्था ने राज्य स्तरीय परिचर्चा का आयोजन किया गया ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इन योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके । इस परिचर्चा की अध्यक्षता डॉ. विशेष गुप्ता अध्यक्ष राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने की साथ ही श्री भगीरथ वर्मा स्पेशल O.S.D. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, श्री पुनीत मिश्रा उप निदेशक महिला एवमं बाल विकास विभाग लखनऊ, श्री पुष्पेंद्र सिंह उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग सहारनपुर संभाग, श्रीमती ऋतू रानी अग्रवाल अध्यक्ष बाल कल्याण समिति हाथरस उ.प्र., श्री अभिषेक पाठक सीनियर प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन, श्रीमती सिमी सुरी डिप्टी जनरल मेनेजर HCL फाउंडेशन विशिष्ठ अतिथी एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे. परिचंर्चा में उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के बाल कल्याण समिति के सदस्यों व अध्यक्ष सहित, सरकारी विभाग के प्रतिनिधियों और प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों व पैरा लीगल वालंटियर, पैनल अधिवक्ताओं सहित 230 से भी ज्यादा प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। परिचर्चा का संचालन चेतना संस्था के निदेशक श्री संजय गुप्ता ने किया जिन्होंने शुरू से लेकर चर्चा के अंत तक सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का ध्यान परिचर्चा के विषय की ओर आकर्षित रखा. 

राज्य बाल आयोग के अध्यक्ष श्री विशेष गुप्ता जी ने अपने उद्बोधन में विस्तार से बताया कि बाल हित मे उत्तर प्रदेश सरकार बहुत तेजी से काम कर रही है इसके लिए अभी 4 जून को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना भी लांच की गई है जिसमें कोविड के कारण जिन बच्चों ने अपने माता-पिता या किसी एक को खो दिया है को कई प्रकार की सुविधा देकर उनका पुनर्वास किया जाएगा इसके अंतर्गत 0 से 18 साल के वे सभी बच्चें आयेंगे साथ ही इसमे 6 से 12 साल की बच्चियों को कस्तूरबा गांधी आवासीय विध्यालय में शिक्षा की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है साथ ही ऐसे बच्चों के लिए लीगल अभिभावक बनाने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके साथ ही साथ यह भी बताया कि यदि इस प्रकार के बच्चों का फोटो कोई मीडिया में जारी करता है तो आयोग उनके खिलाफ करवाई करेगा । 

महिला एवमं बाल विकास विभाग के प्रतिनिधि श्री पुनीत मिश्रा ने बताया कि COVID-19 के कारण 1 मार्च 2020 के बाद जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया, उन बच्चों को जोड़ने की जिम्मेदारी जिला स्तर पर डीपीओ , जिला बाल संरक्षण इकाई और डीएम को दी गई है इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी गठित किया गया है अभी तक हमारे पास लगभग 3000 बच्चो का डाटा आ गया है इनके कागजात की जांच की प्रकिया चल रही है और हम अपनी तरफ से कोशिश कर रहे है कि 30 जून तक बच्चो के खाते में पैसा चला जाये। ।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि श्री भगीरथ वर्मा ने बताया कि इस योजना का लाभ बच्चों तक जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए हर जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को यह जिम्मेदारी दी गयी है कि जिन बच्चों के जरूरी दस्तावेज नही है उसके लिए वह बच्चों के आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र या अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाने में मदद करे ताकि आवश्यक दस्तावेज के अभाव में इस योजना से वंचित न रह जाये , इसके साथ ही साथ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का एक टोल फ्री नंबर 18004190234 है जिस पर बात कर इस तरह की किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान किया जा सकता है ।



श्री पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने सहारनपुर मंडल में बच्चों को इस योजना का लाभ दिलवाने के लिए एक नया मॉडल अपनाया जिसमे अपने विभाग के सभी कर्मचारियों को एक-एक ब्लॉक आवंटित किया और इस योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया हर ब्लॉक और हॉस्पिटल में इसके पोस्टर लगवाए और ग्राम स्तर पर बनी निगरानी समिति और शहरों में बनी मोहल्ला समिति के माध्यम से ऐसे बच्चों का डाटा एकत्रित कर उन्हें चिन्हित किया जिसमें कि शामली में 81, मेरठ में 450 सहारनपुर में 300 बच्चे पाए गए ।

चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन के प्रतिनिधि श्री अभिषेक पाठक ने बताया पहले से ही चाइल्डलाइन के पास कॉल को लेकर बहुत काम थे लेकिन इस कोविड के दौरान अधिकांश काल ऐसे आये जो बच्चों के दस्तावेजों के सम्बंध में थे जिनके बिना किसी भी बच्चे को कोई सुविधा नही मिल पा रही हमारी टीम इस पर भी काम कर रही है इसके लिए डी पी ओ ,बाल कल्याण समिति सबसे समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है ।  

चर्चा में यह बात भी निकल कर आई कि बहुत सारे ऐसे मामले आये है जिनकी कोविड के दौरान मृत्यु हुई और परिवार ने इन्फेक्शन के डर से वह सारे कागज भी जला दिए जो साक्ष्य थे तो इसके लिए ऐसे लाभार्थी जिला स्तर पर बनी टास्क फ़ोर्स में अपील कर सकते है और निगरानी समिति के माध्यम से अपने साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते है । यह बैठक सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने में सफल रही। बैठक की चर्चा में प्रमुखता से जो बात निकल कर आई कि यह एक सहयोगात्मक प्रयास है , जिसमे सभी को मिलकर बच्चो को न्याय दिलाना होगा ।

बैठक के अंत मे संजय गुप्ता, डायरेक्टर चेनता संस्था ने कहा कि सभी को मिलकर बहुत मेहनत के साथ काम करना पड़ेगा और उत्तर प्रदेश को बाल मित्र राज्य बनाना है साथ ही साथ उत्तर प्रदेश के उन जिलों में भी यह मुहिम चलानी होगी जहाँ पर कोरोना के कारण ज्यादा तर बच्चो और उनके परिवारों को क्षति पहुची है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि हम सब जागरूकता अभियान भी चलाएँगे ताकि जन जन तक सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचे और बच्चों को योजनाओं का लाभ मिले।


अधिक जानकारी के लिए कहानी को कवर करें, कृपया संपर्क करें:

श्री संजय गुप्ता (निदेशक, चेतना एनजीओ)

संपर्क विवरण: 98114 32012

श्री भूपेंद्र शांडिल्य (एडवोकेसी हेड , चेतना एनजीओ)

संपर्क विवरण: 9311441098

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