रामकृष्न लाल जगमग जी को विवाह 49वी वर्षगाठ पर लोगो ने बधाई दिया

 


रामकृष्न लाल जगमग जी को विवाह 49वी वर्षगाठ पर समर्पित

प्यार चढ़े परवान आपका अर्धशती होने को आई

अभिज्ञान शकुन्तलम की प्रेमकथा, कविता में बनकर है छाई।।

प्रखर आप की बुद्धि ऐसी विनय विवेक से भरी रहे

अपराजित जीवन हो आपका, तेजस्विता बनी रहे।।


संजय बन अभिषेक करूऔर पाठ करु भगवत गीता

राम के जैसे तुम हो जगमग और शकुन्तला है सीता।।


पीयूस उत्पल अजय तुम्हारे फूल खिले है बगिया मे

भावर जैसे घूम रही हो लहरे यू ही नदिया मे।।


नयी उमगें नयी तरगें फिर से आये सावन मे

एक नया युग फिर लायेगा प्यार तुम्हारे जीवन मे।।

                     कवि- डा पंकज कुमार सोनी

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