कलियुग की पीड़ा को बयां करें तो किससे हम -- कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु


 जीवनदान मिले तुमको बस एक यही दुआ है ईश्वर से !

जीवन का सुख संभव है ज़िंदा धरती पर रहने से !! 

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जीवनदान की इच्छा लेकर सिर झुका है चरणों में ! 

मानवता के परम पुजारी सोचो क्या है फ़र्ज़ तुम्हारा !! 

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जीवनदान मिला तुमको यही खुशी है हमको ! 

जग में पूजा जाए तुमको केवल अच्छे कर्मों से !! 

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कुछ कर्म तुम्हारे अच्छे थे जो जीवनदान मिला तुमको ! 

वरना इस अपराध के बदले मौत तुम्हारी निश्चित थी !! 

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जब याद तुम्हारी आई मुझको आंख में आंसू मेरे थे ! 

बात समझ में आए उसको जीवनदान मिला हो जिसको !! 

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देकर जीवनदान तुम्हें मैं भी अब आजाद हुआ हूं ! 

इतनी लंबी उम्र में मुझको ऐसा दृश्य दिखा नहीं !! 

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तेरे मेरे जीवन की अब गौरव गाथा कौन सुनेगा ! 

जीवनदान देकर उसको एक नया इतिहास रचो !!

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मेरा अपना कर्म था ऐसा पाया मैंने जीवन दान ! 

कलियुग की पीड़ा को बयां करें तो किससे हम !! 

******************तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु कवि व मंच संचालक अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश !

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