ग़ज़लों की महफ़िल की तेरहवीं कड़ी का धमाकेदार आगाज़,प्रख्यात गायक मनीष मानस ने ग़ज़ल गायकी से महफ़िल लूटा,मन्त्रमुग्ध हो घंटों सुनते रहे श्रोता


साहित्य:: वर्तमान कोरोना काल में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काफी विसंगति आ चुकी है, ऐसा लगता है कि ज़िंदगी ठहर सी गयी है! साहित्य का क्षेत्र भी इससे दुष्प्रभाव से अछूता नहीं बचा है और विभिन्न भाषाओं के साहित्य-प्रेमियों और साहित्यकारों द्वारा वर्ष भर चलाये जाने वाले कवि सम्मेलनों, मुशायरों, सम्मान समारोहों समेत हर प्रकार के आयोजनों पर रोक लग गयी है। लेकिन कहते हैं न कि मनुष्य की अदम्य जीजिविषा उसे हर परिस्थिति का अनुकूलन करने में सक्षम बना देती है, सो हम सबने इस भीषण अवसाद की घड़ी में भी ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीने के लिये नये-नये रास्तों की तलाश कर ली है। ज़िंदगी की इसी खोज़ का परिणाम है नवीन संचार माध्यमों का सहारा लेकर हम अपने-अपने घरों में क़ैद होते हुये भी वेबीनार या साहित्य समारोहों को आयोजित कर रहे हैं। इसीलिए हम देख पा रहे हैं कि पिछले कुछ महीनों से साहित्यिक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के निमित्त फेसबुक लाइव एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। फेसबुक लाइव के माध्यम से हम अपने पसंदीदा कवियों-शायर से रूबरू होकर उनकी रचनाओं का रसास्वादन कर रहे हैं ।


इसी क्रम में साहित्य-संस्कृति के संवर्धन में लगी हुई ऐतिहासिक संस्था "पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" भी निरंतर क्रियाशील है। "पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के तत्वावधान में चलने वाली प्रख्यात साहित्यिक संस्था "गजलों की महफ़िल (दिल्ली)" भी लगातार आॅनलाइन मुशायरों एवं लाइव कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।


"पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के अध्यक्ष डाॅ विश्वनाथ झा ने हमारे संवाददाता को बताया कि "न्यास" की ओर से हम भारत के विभिन्न शहरों में साहित्यिक-साँस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। उसी क्रम में ग़ज़लों की महफिल (दिल्ली) की ओर से आयोजित लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) में शायरों के अलावा ग़ज़ल गायकों को भी सप्ताह में एक दिन आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया, ताकि पटल के शायरों की ग़ज़लों को भी स्वर बद्ध कर करके ग़ज़ल प्रेमियों तक पहुँचाया जा सके, साथ ही साथ नामचीन ग़ज़लकारों की ग़ज़लों को भी सुना सके। 


इसी लिए 15 अगस्त 2020 से यह प्रख्यात संस्था, ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली), अपने लाइव कार्यक्रम श्रृंखला के दूसरे चरण में प्रवेश कर गयी, जब यहाँ पर हम सबों ने राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायक आदरणीय पंडित दयानंद परिहस्त जी की ग़ज़ल गायकी का लुत्फ़ लिया।


इसी क्रम में 23 अगस्त 2020, रविवार की शाम तो एक ऐतिहासिक शाम बन गयी जब ढाई घंटे से अधिक समय तक, देश के मशहूर युवा ग़ज़ल गाया मनीष मानस और तबले पर संगति कर रहे युवा कलाकार राहुल ने शाम 4 बजे से लेकर शाम 6:30 बजे तक, अपनी अद्भुत ग़ज़ल गायकी से महफ़िल में मौज़ूद ग़ज़ल प्रेमियों का दिल जीत लिया, सभी सुध-बुध खोकर मनीष मानस की गायकी में डूब से गये।



ठीक 4 बजे मनीष मानस जी और राहुल जी पटल पर उपस्थित हो गए और तबसे लगभग ढाई घंटे तक एक से बढ़कर एक ग़ज़लें गाते रहे।


 


गणेश वंदना के बाद जब उन्होंने उस्ताद शायर और संगीतकार शरद तैलंग की ग़ज़ल:


मेरा उससे प्रीत का बंधन आज भी है


आँखो में इक प्यार का सागर आज भी है


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घर गिरवी रखकर बेटी की शादी में


झूठी शान दिखाना फैशन आज भी है


से कार्यक्रम का आगाज़ किया तो मानो सबके सब एक अलग ही दुनिया में खो गये। सबके मुँह से वाह-वाह निकलने लगे।


इसके बाद तो मनीष मानस ने लगातार, एक से बढ़कर एक, मेहदी हसन की गायी हुई ग़ज़लें सुनायी और मेहदी हसन की याद ताज़ी कर दी।


फिर कुछ देर बाद ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ही चर्चित और मक़बूल शायरा डाॅ दिव्या जैन जी जब ग़ज़ल :


कभी तुझको मेरी हो आरज़ू कभी दिल में मेरा ख़याल हो


कभी नींद हो बिना ख़्वाब के कभी ख़्वाब पे कोई जाल हो


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कभी एक साया भटकता सा दबे पाँव आए मेरी गली


कोई सुब्ह में हो सुरुर सा हो सबा में इत्र गुलाल हो


गायी तो सचमुच दर्शक-श्रोता भाव विभोर हो गये।


इस लाइव कार्यक्रम में मनीष जी पूरी तन्मयता से मेहदी हसन और गुलाम अली की गायी ग़ज़लें सुनाते रहे, और दर्शक-श्रोता आनंद-सागर में डूबते रहे।


फिर मनीष जी ने अंग क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के मशहूर ग़ज़लकार और गायक स्वर्गीय फणी भूषण राय का ये ग़ीत :


मैं अकेला था यहाँ हमसफ़र कोई न था


लूटने वाला मुझे दूसरा कोई न था


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मैं डगर मैं ही मुसाफ़िर मैं ही था मंज़िल 'फणी'


ढूँढ कर देखा शहर में मेरे जैसा मैं ही था


जब सुनाया तो मानो सभी मरहूम शाइर जनाब फणी भूषण राय जी की शाइरी के कायल हो गये और मनीष जी की गायकी तथा राय जी की शाइरी को श्रोताओं की भरपूर दाद मिली। उनका जादू सर चढ़कर बोलने लगा।


ठीक इसके बाद ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ही मशहूर और मक़बूल शायरा डाॅ यास्मीन मूमल की ग़ज़ल:


नहीं रास आते हैं दुनिया के मेले


उधर तुम अकेले इधर हम अकेले


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ज़ुदाई के साये में हमको बिठाकर


बहुत खेल हमसे मुकद्दर ने खेले


गायी तो पंक्तियाँ मानो डाॅ यास्मीन और मनीष लोगों के दिलों में गहरे उतर आए।


उसके बाद भी देर तक एक से बढ़कर एक ग़ज़लें गाते रहे मनीष और तबले की थाप पर सबको रिझाते रहे राहुल। बार-बार पेज पर तालियों की बौछार होती रही।


ग़ज़ल-गायकी के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का समापन जब ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के संचालक और चर्चित समकालीन शायर डाॅ अमर पंकज की इस ग़ज़ल से की गयी:


ख़ौफ के साये में लगती अब है सस्ती ज़िंदगी


मौत से पहले हज़ारों बार मरती ज़िंदगी


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भूलकर अपनी अना सुल्तान का सज़दा करो


जी हुज़ूरी का चलन है कहती रहती ज़िंदगी


तो मानो आज के दौर का भयावह मंज़र लोगों के सामने मूर्त रूप लेकर खड़ा हो गया और लोग शायर की पैनी दृष्टि के साथ मनीष मानस की अद्भुत प्रस्तुति के कायल हो गये। वाह वाह की झड़ी लग गयी तथा कैसे ढाई घंटे बीत गए, पता ही नहीं चला। मंत्रमुग्ध होकर हम सभी मनीष मानस जी को सुनते रहे, पर दिल है कि भरा नहीं।


इस तरह कहा जा सकता है कि प्रख्यात युवा ग़ज़ल गायक मनीष मानस और तबले पर संगति कर रहे युवा कलाकार राहुल की जोड़ी ने ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के आज के लाइव कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। इस युगल जोड़ी ने सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया, यानी कि महफ़िल लूट ली।


मनीष मानस जी के इस कार्यक्रम को फ़ेसबुक पर लाइव देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें 


https://www.facebook.com/groups/1108654495985480/permalink/1478609318989994/


   लाइव@ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के नाम से चर्चित फेसबुक के इस लाइव कार्यक्रम की विशेषता यह है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले से ही, शाम 4 बजे से ही श्रोता पेज पर जुटने लगते हैं और कार्यक्रम की समाप्ति तक मौज़ूद रहते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ, महफ़िल की तेरहवीं कड़ी के रूप में मनीष मानस जी जब तक ग़ज़लें सुनाते रहे, रसिक दर्शक और श्रोतेगण महफ़िल में भाव विभोर होकर डूबे रहे।


पंकज गोष्ठी न्यास द्वारा आयोजित लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के इस कार्यक्रम का समापन टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ओर से डाॅ अमर पंकज जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



कार्यक्रम के संयोजक और ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के एडमिन डाॅ अमर पंकज ने लाइव प्रस्तुति करने वाले शायर आदरणीय दोनों युवा कलाकारों सर्वश्री मनीष मानस और राहुल के साथ साथ दर्शकों-श्रोताओं के प्रति भी आभार प्रकट करते हुए सबों अनुरोध किया कि महफ़िल के हर कार्यक्रम में ऐसे ही जुड़कर टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) का उत्साहवर्धन करते रहें।


डाॅ अमर पंकज ने टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के सभी साथियों, डाॅ दिव्या जैन जी , डाॅ यास्मीन मूमल जी, श्रीमती रेणु त्रिवेदी मिश्रा जी, श्री अनिल कुमार शर्मा 'चिंतित' जी, श्री पंकज त्यागी 'असीम' जी और डाॅ पंकज कुमार सोनी जी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करते हुए उन्हें इस सफल आयोजन-श्रृंखला की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित की।


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