विकास दूबे कांड में निलंबित एवं गिरफ्तार दरोगा पहुंचा सुप्रीमकोर्ट,पत्नी के माध्यम से जान खतरे में होने की बात कह याचिका दायर की


नई दिल्ली: कुख्यात अपराधी विकास दूबे के यहां छापेमारी के दौरान सूचना देने के मामले में कथित भूमिका निभाने को लेकर निलंबित और गिरफ्तार किए गए पुलिस के एक अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर सुरक्षा देने की मांग की है. उसने मुठभेड़ों का हवाला देते हुए सुरक्षा मांगी है, जिसमें दुबे और उसके सहयोगी मारे गए.


अपनी पत्नी विनीता सिरोही के मार्फत दायर याचिका में अधिकारी कृष्ण कुमार शर्मा ने आशंका जताई है कि उसे भी ‘अवैध और असंवैधानिक तरीकों’ से मारा जा सकता है.


विकास दुबे शुक्रवार को पुलिस के साथ मुठभेड़ में भैती इलाके में तब मारा गया था जब उज्जैन से उसको लेकर आ रहा वाहन कथित तौर पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसने भागने का प्रयास किया.


कानपुर के चौबेपुर इलाके के बिकरू गांव में तीन जुलाई को दुबे की गिरफ्तारी के लिए गई पुलिसकर्मियों की टीम पर उसने और उसकी टीम ने हमला कर दिया था जिसमें पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे.


सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में शर्मा ने कहा कि उसे इस आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया कि उसने बिकरू गांव में पुलिस की छापेमारी के बारे में आरोपियों को सूचना दी थी.


फिलहाल जेल में बंद शर्मा ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि उसके प्रभारी और चौबेपुर थाने के एसएचओ विनय तिवारी ने उसे थाने में ही रहने के निर्देश दिए थे.


शर्मा ने बताया कि तिवारी ने उससे कहा कि वह फोन पर मिले निर्देश के मुताबिक एक अपराधी को गिरफ्तार करने जा रहे हैं और जीटी क्रॉसिंग रोड पर जांच के भी निर्देश हैं.


याचिका में कहा गया है, ‘यह भी बताया जाता है कि कथित जनरल डायरी ब्यौरा अपने आप में सबूत है और गिरफ्तारी के बारे में झूठ का पर्दाफाश है. याचिकाकर्ता संख्या एक (शर्मा) को दिखाया गया कि वह भाग रहा है जबकि रिकॉर्ड में यह बात है कि याचिकाकर्ता संख्या एक थाना परिसर के अंदर स्थित आवास में था.’


वकील अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मौदाहा में आरोपी अमर दुबे की मुठभेड़ में मृत्यु ‘संदिग्ध परिस्थितियों’ में हुई.


याचिका में कहा गया है, ‘उपरोक्त सभी आरोपियों की न्यायेत्तर हत्या वर्तमान प्राथमिकी में जांच के जिम्मेदार सभी एजेंसियों के व्यवहार और उनके काम के तरीके को दिखाता है. यह स्पष्ट है कि जिस संस्था को राज्य में कानून-व्यवस्था की रक्षा की जिम्मेदारी दी गई है वे कानून अपने हाथों में ले रहे हैं और आरोपियों को गिरफ्तार करते ही उनकी हत्या कर दी जा रही है.’


याचिका में शर्मा के लिए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त जीवन के अधिकार की रक्षा की मांग की गई है. साथ ही जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की भी मांग की गई है.


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