बस्ती जनपद के परशुरामपुर थाना क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, कहीं विभागीय पनाह तो नही,गरीब तबके के लोग हो रहे शिकार


बस्ती शहर व गांव की गलियो से लेकर मुख्य मार्केटों तक झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार हो गई है। आलम यह है कि एक-एक गली में चार-चार क्लीनिक चल रहे हैं। बिना किसी डिग्री के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े हर मर्ज का इलाज इनके यहां होता है। अगर मरीज थोड़ा ठीक भी है और इनके इलाज अगर वो बीमार पड़ जाए तो इससे इनको कोई परवाह नहीं है।*


*इन झोलाछाप डॉक्टरों का लक्ष्य सिर्फ चंद पैसे कमाना ही होता है। यही वजह है कि आए दिन गरीब तबके के लोग इन डॉक्टरों के शिकार हो जाते हैं। जिससे वे अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। इसके बावजूद भी ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।*


*गली और मुख्य सडकों पर दुकान क्लीनिक खोले सैकड़ों झोलाझाप डाॅक्टरों में अब तक केवल कुछ ही डाॅक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साल 2019में अभी तक केवल 48 झोलाछाप डाॅक्टरों को ही सिर्फ नोटिस भेजा गया है। ये नोटिस विभाग के द्वारा दिया गया है। इसके अलावा कोर्इ कार्रवार्इ नहीं की गई । यहीं कारण है कि झोलाझाप डाॅक्टर स्वास्थ्य विभाग से जरा भी नहीं डरते।*


*झुग्गी और गांव वाले होते हैं इनके शिकार*


*झाेलाझाप डाॅक्टरों का शिकार शहर में कंस्ट्रक्शन साइटों में काम करने वाले मजदूर आैर गांव में रहने वाले गरीब लोग हो रहे हैं। ये लोग इन डाॅक्टरों से 20 से 50 रुपये में दवार्इ ले लेते हैं। जिसका खामयाजा कर्इ बार उन्हें अपनी मौत को गले लगाकर चुकाना पडता है। अब तक एेसे कर्इ मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें झोलाझाप डाॅक्टरों की दवार्इ से लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।*


*स्वास्थ्य विभाग का भी नहीं है कोर्इ खौफ*


*झुग्गियों व गांवों में सैकड़ों की संख्या में झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक चला रहे हैं। उन्हें पता है कि विभाग कभी छापेमारी करने नहीं आएगा चूंकि विभागीय अधिकारियों के साथ उनकी सांठ-गांठ रहती है। किसी शिकायत पर अगर छापेमारी हो भी जाती है तो इसकी जानकारी इन्हें पहले ही मिल जाती है। अवैध क्लीनिकों के अलावा अवैध मेडिकल स्टोर भी सैकड़ों की संख्या में चल रहे हैं। यही नहीं इन मेडिकल स्टोर पर उन दवाइयों को भी आसानी से लिया जा सकता है जिन पर बैन है।*


*इन जगहों पर है सबसे ज्यादा झाेलाझाप डाॅक्टर*


*बस्ती जनपद के शहरों में व गांव की गलियों समेत दुबौलिया, परसरामपुर, नगर , कलवारी ,कप्तानगंज , महाराजगंज , हरैया सहित कर्इ गांवों में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। यहीं हाल अन्य गांवों का भी है।*


*झापेमारी से पहले ही मिल जाती है जानकारी*


*सूत्रों का दावा है कि किसी झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ जब भी किसी के द्वारा शिकायत करने पर छापेमारी की जाती है। तो इससे पहले ही उन्हें इस छापेमारी की जानकारी मिल जाती है। इसी का फायदा उठाकर ये झोलाछाप डाॅक्टर अपनी दुकान बंद कर मौके से गायब हो जाते हैं।*


सब्लू खान की रिपोर्ट 


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