संस्था ह्यूमन सेफ लाइफ फाउण्डेशन की ओर से मासिक धर्म स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए महिलाये आयी सामने, किया लोगों को जागरूक


बस्तीः स्वास्थ्य जागरूकता एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दे रही सामाजिक संस्था ह्यूमन सेफ लाइफ फाउण्डेशन की ओर से मासिक धर्म स्वच्छता अभियान के तहत संचालित नारी हिम्मत कार्यक्रम के दूसरे चरण में महिला प्रकोष्ठ की ओर से सोशल मीडिया के जरिये लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिम्मेदारी संभाल रहीं सुर्ती हट्टा निवासी सामाजिक कार्यकत्री नीलम मिश्रा ने कहा हमारा मासिक धर्म हमारा अभियमान है। उसी की वजह से मै एक मां हूं और मुझे मातृत्व का गौरव मिला।



सामाजिक कार्यकत्री कटरा निवासी संध्या दीक्षित ने कहा मासिक धर्म के प्रति समाज को अपना घटिया ख्याल बदलना होगा। नारी के लिये इससे बड़ी गौरव की बात नही हो सकती। मासिक धर्म ही वह प्राकृतिक उपहार है जो नारी को सम्पूर्ण परिपक्व बनाता है। सामाजिक कार्यकत्री पाण्डेय बाजार निवासी रंजना अग्रवाल ने कहा मासिक धर्म के समय महिलाओं को अछूत समझा जाता है। उन्हे पूजा, रसोई से अलग कर दिया जाता है। स्वच्छता के अपने मापदण्ड हैं लेकिन इस पैमाने तक मासिक धर्म से नफरत करना घटिया ख्यालात को रेखांकित करते हैं। ऐसे में सदियों पुरानी धारणा बदलकर आधी आबादी को उचित सम्मान और गौरव प्रदान करना होगा।


 


ब्लाक रोड निवासी सामाजिक कार्यकत्री स्वाती श्रीवास्तव ने कहा मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना चाहिये, क्योंकि ऐसे हालात में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। स्वाती ने कहा इस दिशा में अभी समाज को काफी हद तक जागरूक करने की जरूरत है। आधुनिक भारत में लागों की सोच और शोध सूरज और चांद तक पहुंच गये लेकिन महिलाओं को लेकर समाज की सोच में बहुत ज्यादा फर्क नही आया है। आधी आबादी को पूरा हक दिलाने की बात कहने वाले समाज आज भी नारी को उपभोग की विषयवस्तु समझता है।



 


खुशी केसरी, आंचल अग्रवाल, रामू केसरी, पूनम मोदनवाल आदि का योगदान सराहनीय रहा। नारी हिम्मत अभियान की सराहना करते हुये फाउण्डेशन के चेयरमैन एवं रेडक्रास ट्रेनर रंजीत श्रीवास्तव ने कहा कि अभी बहूत से ऐसे प्रसंग है जिससे समाज को जागरूक करने की जरूरत है। प्रयास है कि लोगों की सोच बदले। जिलाध्यक्ष अपूर्व शुक्ला ने कहा महिला प्रकोष्ठ की सक्रियता इस बात का प्रतीक है कि आगामी दिनों में इसके अच्छे परिणाम आयेंगे और घर की दहलीज तक खुद को सीमित रखने वाली महिलाओं ने भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझनी शुरू कर दी है।


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