इंटरनेट व स्मार्ट फोन के अभाव में व्हाट्सएप वर्चुअल क्लास की कल्पना कैसे साकार होगी 80%ग्रामीण परिवेश से है:-संजय द्विवेदी


स्मार्ट फोन व इंटरनेट के अभाव में कैसे चेलेगा वाटशाप वर्चुअल क्लास: संजय द्विवेदी


बस्ती। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के मण्डलीय मंत्री संजय द्विवेदी ने कहा कि इंटरनेट व स्मार्ट फोन के अभाव में व्हाट्सएप वर्चुअल क्लास की कल्पना कैसे साकार होगी। ग्रामीण परिवेश के छात्र-छात्राओं के 80 प्रतिशत अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नही है। विद्यालयों के पेड़ छात्र-छात्राओं का मोबाइल डेटा भी उपलब्ध नही है। इस विकट परिस्थिति में सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
            श्री द्विवेदी ने कहा कि कोविड-19  महामारी के समय जब विद्यालय बंद चल रहे हैं, तब उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने व्हाट्सएप वर्चुअल क्लास आयोजित करने के लिए 9 बिंदु का दिशा निर्देश जारी किया है, जो व्यवहारिक प्रतीत नही हो रहा है। ग्रामीण परिवेश के विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों की आर्थिक दशा अच्छी नहीं है। वर्तमान में गांव में गेहूं के फसल की कटाई एवं हार्वेस्टिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। छात्र इन कार्यों में अपने माता-पिता का हाथ बंटा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के पास मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप जैसे संसाधन उपलब्ध नहीं है। विद्यालयों के पास छात्र-छात्राओं के मोबाइल फोन भी उपलब्ध नही है।  इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सुगम एवं निर्बाध रूप से चलने वाले इंटरनेट की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है। 
     ऐसे में यदि हम महानगरों के कॉन्वेंट एवं इंग्लिश मीडियम के विद्यालयों की तर्ज पर इस व्यवस्था को आधे-अधूरे और उचित तैयारी एवं प्रशिक्षण के बिना लागू करते हैं, तो यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन अधिकांश छात्रों के साथ नाइंसाफी होगी, जिनके पास उपर्युक्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। यह समाज में भेदभाव को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था बन कर रह जाएगी।
           श्री द्विवेदी ने कहा है कि संगठन सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग करता है। चंदेल गुट चाहता है कि केवल सीबीएससी और आईसीएससी बोर्ड के विद्यालयों जो शहरों में स्थित है और जिस में पढ़ने वाले अधिकांश छात्रों के अभिभावक आर्थिक रूप से मजबूत हैं, उनकी नकल ना करके प्रदेश की भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था के अनुरूप यूपी बोर्ड के विद्यालयों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर आदेश जारी करने का कष्ट करें।


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